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स्वास्थ्य-सबके लिए

शुक्रवार, 10 दिसम्बर 2010

कितना नमक खाएं

आधुनिक शोधों से पाया गया है कि किशोर अन्य आयु वर्ग के व्यक्तियों से अधिक नमक खाते हैं जो उन्हें संसाधित खाद्यों से प्राप्त होता है. इनकी प्रतिदिन खाए गए नमक की मात्रा ९ ग्राम तक हो सकती है. इस आयु में नमक की अधिकता से वयस्क अवस्था में उन्हें उच्च रक्त चाप और ह्रदय रोगों की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए शोधकर्ता किशोरों के भोजन में नमक की मात्रा ६ ग्राम प्रतिदिन तक सीमित करने की संस्तुति करते हैं. इससे उनमें मानसिक तनावग्रस्त होने की संभावना ४४ से ६३ प्रतिशत कम होती पायी गयी है. इसके अतिरिक्त उनकी वयस्कावस्था में ह्रदय रोगों में ७ से १२ प्रतिशत कमी होना पाया गया है. शरीर में नमक की अधिकता से उच्च रक्त चाप और ह्रदय रोगों के अतिरिक्त उदर-शूल, उदर-कैंसर आदि की संभावना बढ़ती है.  
 

प्रत्येक २.५ ग्राम नमक शरीर को १ ग्राम सिडियम प्रदान करता है. इसलिए ९ ग्राम नमक प्रतिदिन का अर्थ शरीर को ३.८ ग्राम सोडियम की प्राप्ति होना होता है जो शरीर के लिए अनेक प्रकार से घातक सिद्ध होता है. जबकि किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रतिदिन २.५ ग्राम सोडियम से अधिक नहीं लेना चाहिए और आदर्श रूप में यह मात्रा केवल १.६ ग्राम प्रतिदिन है. यद्यपि भोजन में सोडियम का प्रमुख स्रोत नमक होता है किन्तु सोडियम बाइकार्बोनेट (खाना सोडा), सुगंधि संवर्धक मोनोसोडियम ग्लूटामेट, मधुरता प्रदायक सोडियम सेकैरीन, खाद्य संरक्षक सोडियम बेंजोएट तथा सोडियम नाइत्राइत, आदि इसके अन्य स्रोत हैं. सभी प्रसाधित खाद्यों में नमक का उपयोग एक या अनेक कारणों से अधिकता से किया जाता है. इसलिए इनसे यथासंभव बचना चाहिए. इसके अतिरिक्त अनेक सब्जियों और फलों में नमक की उपस्थिति प्राकृत रूप से होती है.

अल्प मात्रा में सोडियम शरीर के लिए आवश्यक होता है क्योंकि शरीर के अधिकाँश तरलों जैसे रक्त, आदि में सोडियम उपस्थित होता है. इससे शरीर में तरल द्रव्यों का संतुलन बनाये रखने में सहायता मिलती है तथा मस्तिष्कीय नाडियों और मांसपेशियों में विद्युत् संकेत भी सोडियम के माध्यम से ही प्रवाहित होते हैं. इसलिए शरीर में सोडियम की कमी से मांसपेशियों की जकड़न होने लगती है जो इसकी अल्पता से शरीर में जल की अल्पता के कारण होती है.
American Heart Association Low-Salt Cookbook, 3rd Edition: A Complete Guide to Reducing Sodium and Fat in Your Diet

भोजन में सोडियम की अधिकता होने से यह रक्त में पहुंचता है जहां से इसे किडनियों द्वारा निकाला जाकर मूत्र मार्ग से बाहर कर दिया जाता है. किडनी रोगियों और शिशुओं में सोडियम की अधिकता शरीर से बाहर नहीं हो पाती और उनपर घातक प्रभाव उत्पन्न करती है. इस कारण से शिशुओं के भोजन में नमक का उपयोग घातक होता है. कुछ नमक पसीने के माध्यम से भी शरीर से बाहर जाता है. इसलिए अधिक परिश्रम कर पसीना बहाने वाले व्यक्तियों को नमक की अतिरिक्त मात्रा की आवश्यकता होती है.

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