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स्वास्थ्य-सबके लिए

शनिवार, 4 दिसम्बर 2010

स्मृति विभ्रम

प्रयास करते हुए भी कोई ज्ञात तथ्य अज्ञात हो जाना स्मृति विभ्रम कहलाता है. प्रायः ऐसा होता है कि सामने वाले व्यक्ति का चेहरा जाना-माना प्रतीत होता है किन्तु यह स्मृत नहीं हो पाता कि उसका नाम क्या है और उससे कहाँ परिचय हुआ था. ऐसी स्थिति में कुछ मानसिक वेदना होती है, जो मस्तिष्क पर वांछित सूचना खोजने के लिए जोर डालती है. यह प्रयास सफल हो अथवा नहीं, प्रयास स्वयं ही स्मृति विभ्रम से बचने का एक कारगर उपाय है.

स्मृति विभ्रम स्मृति क्षय से भिन्न व्याधि है किन्तु क्षय विभ्रम से ही आरम्भ होता है यदि विभ्रम की स्थिति में कारगर उपाय न किये जाएँ. स्मृति क्षय में सब कुछ भुला दिया जाता है जो जीवन की दैनन्दिन गतिविधियों में भी बाधक सिद्ध होता है जब कि स्मृति विभ्रम में सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहता है. स्मृति विभ्रम प्रायः वृद्धावस्था में होता है जो मस्तिष्क की स्मृति कोशिकाओं को पर्याप्त पोषण न प्राप्त होने अथवा उनका दीर्घ काल तक उपयोग न किये जाने के कारण होता है.

वृहत और महत्वपूर्ण विषयों में लिप्त रहने के कारण कुछ छोटी-मोती और अमहत्वपूर्ण तथ्यों का विस्मृत हो जाना स्मृति विभ्रम नहीं है. ऐसा प्रायः सभी के साथ और युवावस्था में भी होता है. किसी भी विषय अथवा वस्तु का क्षणिक परिचय स्मृति में अंकित नहीं हो पाता. इसके लिए विषय अथवा वस्तु का दो या अधिक माध्यमों से अथवा अल्प अंतराल पर दो या अधिक बार मस्तिष्क में पहुँचना वांछनीय होता है. किसी व्यक्ति को देखा और उससे कुछ वार्तालाप किया, इस प[रकार दो माध्यमों से उसके बारे में सूचनाएं मस्तिष्क को पहुँची. किसी अन्य व्यक्ति के सापेक्ष जिसे केवल देखा गया हो अथवा किसी माध्यम से उसका मात्र परिचय पाया गया हो, प्रथम व्यक्ति के बारे में दीर्घ काल तक स्मृति बनी रहती है.

किसी विषय अथवा वस्तु के प्रति मानसिक रूप से सघन संलग्नता उसके बारे में स्मृति में सहायक होती है. अतः किसी विषय के बारे में अच्छी स्मृति के लिए जो भी लक्ष्यित करें, पूर्ण रूचि के साथ करें. ऐसा कराने में अनेक अलक्ष्यित सूचनाएं भी मस्तिष्क को पहुँचती रहती हैं जो नकार दी जाती हैं. जीवन जीने की यह एक शैली है. इसके विपरीत दूसरी शैली यह है कि व्यक्ति अपने पारिस्थितिकी के अधिकाधिक अवयवों के प्रति चैतन्य रहे जिससे उसकी स्मृति भी वृहत स्तर पर सक्रिय बनी रहे. ऐसी स्मृति में गहनता के अभाव के कारण यह दीर्घ काल तक बनी नहीं रहती. अतः स्मृति एक व्यापार है जिसके लिए हमें छंटनी करनी होती है कि हमें क्या दीर्घ काल तक स्मृत रखना है और क्या केवल सामयिक रूप में. तदनुसार ही हमें उन्हें मानसिक गहनता प्रदान करने की आवश्यकता होती है.

मस्तिष्क को पहुँची प्रत्येक सूचना उसके गहन अंतराल में एक लहर उत्पन्न करती है जो पुनरावृत्ति पर बाहर की ओर आगे बढ़ती जाती है और साथ हे गहन और स्थायी चिन्ह छोड़ती जाती है. ये चिन्ह ही स्मृत सूचनाएं होती हैं. इस प्रकार लघुकालिक स्मृतियाँ मस्तिष्क के अन्दर तथा दीर्घकालिक स्मृतियाँ इसके बाहर की ओर अंकित होती हैं. इस लिए बालपन की स्मृतियाँ जीवन भर की पुनरावृत्तियों के कारण वृद्धावस्था की अंकित स्मृतियों से अधिक स्थाई होती हैं. इसके साथ ही वृद्धावस्था में मस्तिष्क की कोशिकाओं में बालपन का लचीलापन नहीं होता जिससे वृद्धावस्था में स्मृतियों का अंकन दुष्कर होता है. आयु में वृद्धि के साथ स्मृतियों की खोज धीमी हो जाती है जिससे अंकित सूचनाएं पाने में अधिक समय लगता है. इससे व्यक्ति की कार्य-कौशल, भाषा ज्ञान और चिंतन सामर्थ्य भी दुष्प्रभावित होती है और व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आने लगते हैं.

स्मृति क्षय को आंशिक रूप से रोका तथा लौटाया जा सकता है. इसके लिए मस्तिष्क को सक्रिय रखना प्राथमिक रूप से अनिवार्य होता है जो मानसिक खेल जैसे पहेलियाँ बुझाना, शतरंज, आदि से किया जा सकता है. अध्ययन एवं लेखन इसके सार्वभौमिक एवं चिर-परिचित उपाय हैं. इसके साथ ही व्यक्ति को ऐसे पोषक द्रव्य दिए जाने चाहिए जिनसे मस्तिष्क की अधिकाधिक कोशिकाओं में रक्त प्रवाह बना रहे. उच्च नाइट्रेट खाद्य जैसे चुकंदर, पालक, फल आदि इस प्रकार के खाद्य हैं.
Keeping Busy: A Handbook of Activities for Persons with Dementia

शरीर में जल का अभाव, उच्च ज्वर तथा शरीर में विटामिनों एवं खनिजों की कमी से स्मृति विभ्रम शीघ्रता से पनपता है इसलिए ऐसे रोगों की त्वरित चिकित्सा की जानी चाहिए. प्रसन्नतादायक पारिवारिक वातावरण विशेषकर वृद्धों को बच्चों का साथ स्मृति विभ्रम को रोकने में सहायक सिद्ध होता है. और अंत में एक सूत्र 'वृद्धजन चिंतन में लिप्त रहें किन्तु चिंताओं से मुक्त रहें'.

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