
मछलियाँ अनेक जाति-प्रजातियों की पायी जाती हैं, किन्तु जिन जातियों से मछली तेल प्राप्त किया जाता है उनमें मेकेरल, ट्राउट, हेलिबट, टूना, सार्डाइन, तथा साल्मोन प्रमुख हैं. मछली तेल से प्राप्त स्वास्थ लाभ अनेक हैं जिनमें से प्रमुख निम्नांकित हैं -
ह्रदय रोग -
मछली तेल में उपलब्ध ओमेगा-३ ह्रदय को स्वस्थ और रोगों से दूर रखता है. यह रक्त में हानिकर कोलेस्ट्रोल एल डी एल को कम करता है और लाभकर कोलेस्ट्रोल एच डी एल को बढाता है. इस प्रकार मछली तेल के नियमित उपयोग से हृदयाघात की संभावना कम होती है
रक्त प्रवाह -
मछली तेल शरीर में त्राइग्लिस्राइद को सीमित करके रक्त प्रवाह को बढ़ाता है जिससे शरीर के अंग-प्रत्यंग स्वस्थ रहते हैं.
जलन -
मछली तेल में जलन रोधी गुण विद्यमान हैं इसलिए यह रक्त और मांसपेशियों में जलन कम करने में प्रभावी होता है. इसके नियमित सेवन से जलन के नियमित रोगियों को लाभ होता है. इसके अतिरिक्त यह उदर और आँतों की जलन और अन्य रोगों के उपचार में भी उपयोगी पाया गया है.
अवसाद और चिंता
मछली तेल में ओमेगा-३ वसीय अम्लों की उपस्थिति के कारण यह व्यक्ति में अवसाद, उदासी, चिंता, व्याकुलता, मानसिक थकान, तनाव, मैथुन के प्रति उदासीनता, आदि मानसिक रोगों को दूर करता है और व्यक्ति में सक्रियता का संचार करता है.
मानसिक सुधार प्रायः बच्चों में अत्यधिक गतिविधियों के कारण आवश्यक कार्यों पर ध्यान संकेन्द्रण की कठिनाई होती है. मछली तेल में वसीय अम्लों की प्रचुरता के कारण यह मानसिक स्थिरता लाता है. इसके अतिरिक्त इसके नियमित सेवन से स्मरण शक्ति में सुधार भी पाया गया है. चूंकि मस्तिष्क की संरचना में ६० प्रतिशत वसा - विशेषकर ओमेगा-३ तथा ओमेगा-६, होती हैं, मछली तेल का सेवन मस्तिष्क के स्वास्थ और इसके कार्यों में गुणात्मक सुधार करता है. गर्भवती महिलाओं द्वारा इसके सेवन से उन द्वारा उत्पन्न बच्चे मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ पाए गए हैं.
नेत्र रोग
मछली तेल निश्चित रूप से नेत्र ज्योति में सुधार करता पाया गया है. नेत्रों की मांसपेशियों और अन्य अंगों पर आयु के दुष्प्रभाव को भी यह कम करता है.

त्वचा सौन्दर्य -
त्वचा का सूखापन तथा रूखापन मछली के तेल के सेवन से दूर होता है जिससे व्यक्ति का सौन्दर्य और आकर्षण बढ़ता है. यह त्वचा के अनेक रोगों जैसे दाद, खाज, खुजली आदि के उपचार में भी उपयोगी सिद्ध होता है जिसके लिए इसकी मालिश भी की जा सकती है.
गर्भावस्था -
गर्भावस्था में स्त्री द्वारा मछली तेल के सेवन से गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और आँखों के विकास में सुधार होता है जो इसमें उपस्थित डी एच ए की उपस्थिति के कारण होता है. इससे गर्भस्थ शिशु के शारीरिक विकास में भी सहायता मिलती है.
केश स्वास्थ एवं सौन्दर्य -
परम्परागत रूप से मछली को भोजन के रूप में उपयोग करने वाले व्यक्तियों के केश दीर्घ काल तक काले और सुन्दर बने रहते हैं. मछली तेल में उपस्थित ओमेगा-३ केशों को पोषण प्रदान करता है. अतः इससे केश तीव्रता से वृद्धि करते हैं तथा झडने से रुकते हैं. केश और नाखूनों के स्वास्थ में भोजन में प्रोटीनों की प्रचुरता बहुत उपयोगी होती है जो मछली में पर्याप्त होती हैं.
चेतावनी -
मछली तेल के अधिक सेवन से शरीर हानि भी हो सकती है विशेषकर अरुचि और अपच. साथ ही यह कुछ रोगों को बढ़ा भी सकता है. इसलिए इसका सेवन चिकित्सक के परामर्श से ही करना चाहिए.

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