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स्वास्थ्य-सबके लिए

शनिवार, 18 सितम्बर 2010

स्वास्थ में लौह का महत्व

मनुष्य के शरीर में पोषण का संतुलन बनाये रखने में लौह का अतीव महत्व है. जहां एक ओर यह शरीर की वृद्धि और इसे जीवित बनाये रखने के लिए अनिवार्य है वहीं यह शरीर की अनेक प्रक्रियाओं जैसे ऑक्सीजन संवहन और भंडारण, अस्थि-पंजर और ह्रदय की मांसपेशियों के ऑक्सीकरण, भोजन के पाचन, आदि के लिए भी अपरिहार्य है. तथापि इसकी शरीर में मात्रा का नियमन आवश्यक है क्योंकि यह अघुलनशील होने के कारण इसकी अधिक मात्रा विषमय सिद्ध होती है.

शरीर में लोह की कमी से पोषण में अभाव के कारण रक्ताभाव, उदर में जलन, पार्किन्सन व्याधि, वात-रोग, और किडनी निर्बलता जैसे रोग उत्पन्न हो जाते हैं. पार्किन्सन व्याधि में शरीर के अंग-प्रत्यंगों, विशेषकर हाथों में अनियंत्रित कम्पन होने लगते हैं जिसके कारण मनुष्य द्वारा कोई भी कार्य करना दुष्कर हो जाता है. यद्यपि यह रोग अनुवांशिक है तथापि शरीर में लौह की उचित मात्रा बनाए रखने से इस रोग की तीव्रता पर नियंत्रण किया जा सकता है. बार बार ह्रदय गति में अवरोध उत्पन्न होने का भी लोह की कमी से सम्बन्ध पाया गया है. लोह की कमी से से विश्व की लगभग एक तिहाई जनसँख्या पीड़ित है.

शरीर में लोह का सुपरिचित कार्य रक्त के माध्यम से संपन्न होता है जहां यह श्वसन तंत्र से ऑक्सीजन अवशोषित करके लाल रक्त कण बनाता है जो रक्त प्रवाह द्वारा ऑक्सीजन को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाते हैं. साथ ही लौह का लगभग भाग अस्थियों के निर्माण में उपयोग होता है. रक्त में लौह के अभाव में लाल रक्त कणों का अभाव हो जाता है जिससे मनुष्य के शरीर की लालिमा धूमिल हो जाती है.

शरीर में लौह के कमी प्राकृत खाद्यों के सेवन से दूर की जा सकती है. जिन खाद्यों में लौह की पर्याप्त मात्रा उपस्थित है, उनमें मांस, सेम की फलिया, दालें, हरी पत्तीदार भाजियां, चोकलेट, मूंगफली, मुनक्का, किशमिश, सोयाबीन, आदि सम्मिलित हैं. तथापि इस कमी को दूर करने के लिए औषधि के रूप में रासायनिक गोलियां भी उपलब्ध हैं.

Improving Outcomes in Chronic Heart Failure: A practical guide to specialist nurse interventionयद्यपि शरीर में रक्ताभाव लोह की कमी का प्रथम संकेत रक्ताभाव माना जाता है किन्तु अनेक व्यक्तियों में लोह की कमी होने से रक्ताभाव उत्पन्न नहीं होता. इसलिए इसका अनिवार्य संकेत शारीरिक श्रम से शीघ्र थकान माना जाने लगा है जिससे जीवन की गुणता में गिरावट आती है. बार-बार हृदयाघात की स्थिति में भी पाया गया है कि शरीर को लोह से पुष्ट करने पर उनकी कार्य करने की सामर्थ्य में वृद्धि और जीवन की गुणता में सुधार होता है.

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