शरीर में लोह की कमी से पोषण में अभाव के कारण रक्ताभाव, उदर में जलन, पार्किन्सन व्याधि, वात-रोग, और किडनी निर्बलता जैसे रोग उत्पन्न हो जाते हैं. पार्किन्सन व्याधि में शरीर के अंग-प्रत्यंगों, विशेषकर हाथों में अनियंत्रित कम्पन होने लगते हैं जिसके कारण मनुष्य द्वारा कोई भी कार्य करना दुष्कर हो जाता है. यद्यपि यह रोग अनुवांशिक है तथापि शरीर में लौह की उचित मात्रा बनाए रखने से इस रोग की तीव्रता पर नियंत्रण किया जा सकता है. बार बार ह्रदय गति में अवरोध उत्पन्न होने का भी लोह की कमी से सम्बन्ध पाया गया है. लोह की कमी से से विश्व की लगभग एक तिहाई जनसँख्या पीड़ित है.
शरीर में लोह का सुपरिचित कार्य रक्त के माध्यम से संपन्न होता है जहां यह श्वसन तंत्र से ऑक्सीजन अवशोषित करके लाल रक्त कण बनाता है जो रक्त प्रवाह द्वारा ऑक्सीजन को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाते हैं. साथ ही लौह का लगभग भाग अस्थियों के निर्माण में उपयोग होता है. रक्त में लौह के अभाव में लाल रक्त कणों का अभाव हो जाता है जिससे मनुष्य के शरीर की लालिमा धूमिल हो जाती है.
शरीर में लौह के कमी प्राकृत खाद्यों के सेवन से दूर की जा सकती है. जिन खाद्यों में लौह की पर्याप्त मात्रा उपस्थित है, उनमें मांस, सेम की फलिया, दालें, हरी पत्तीदार भाजियां, चोकलेट, मूंगफली, मुनक्का, किशमिश, सोयाबीन, आदि सम्मिलित हैं. तथापि इस कमी को दूर करने के लिए औषधि के रूप में रासायनिक गोलियां भी उपलब्ध हैं.



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