विगत एक माह से एक रूसी सुन्दरी के प्रेम पत्र पाता रहा हूँ, उसकी चित्ताकर्षक तस्वीरों के साथ. बहुत सावधान रहना पड़ रहा है उसके लावण्य से, अभी तक कुप्रभावित नहीं हुआ हूँ. किन्तु यहाँ चर्चा उस प्रकार के नमक की न होकर भोजन में उपयोग किये जाने वाले नमक की है. ज्ञात हुआ है दोनों प्रकार के नमकों के अतिरेक घातक सिद्ध होते हैं. वस्तुतः दोष भोजन के नमक का न होकर उसके तत्व सोडियम का है जो नमक में लगभग ४० प्रतिशत होता है और मनुष्य के रक्त चाप की वृद्धि करता है जिससे हृदयाघात की संम्भावना बढ़ती है ठीक उसी तरह जिस प्रकार दोष लावण्य का न होकर उसके अवयव कामुकता का होता है.
शोधों से निष्कर्ष निकाला गया है कि यदि विश्व की जनसँख्या का प्रत्येक सदस्य १,२०० मिलीग्राम सोडियम प्रतिदिन कम कर दे तो विश्व में ह्रदय रोगियों की संख्या ६०,००० से १२०,००० तक कम हो जायेगी. तदनुसार ३२,००० से ६६,००० तक हृदयाघात कम हो जायेंगे. अमेरिका में सन २००५ की भोजन की मार्गदर्शिका में कहा गया है कि उच्च रक्तचाप, वयो-मध्य और वयो-वृद्ध, तथा काले वर्ण वाले व्यक्तियों को भोजन में सोडियम की मात्रा १,५०० मिलीग्राम प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कम कर देनी चाहिए. इन वर्गों में अमेरिका की ७० प्रतिशत जनसँख्या सम्मिलित है.
उच्च रक्तचाप उस समय कहा जाता है जब व्यक्ति का सिस्टोलिक रक्तचाप १४० mmHg से अधिक तथा डायास्टोलिक रक्तचाप ९० mmHg से अधिक हो. ऐसी अवस्था में व्यक्ति व्याकुलता का अनुभव करता है और उसे शीघ्र क्रोध आने लगता है.
रक्त चाप पर नियंत्रण के लिए रोगियों को सोडियम की मात्रा १५०० मिलीग्राम प्रतिदिन से कम रखनी चाहिए. रोगियों के अतिरिक्त यह सीमा श्याम वर्ण के लोगों और ४० वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए भी निर्धारित है. इसके लिए २/३ चाय के चम्मच नमक की मात्रा प्रतिदिन पर्याप्त होती है. अन्य वर्गों के लिए यह मात्रा २३०० मिलीग्राम प्रतिदिन तक जा सकती है, जिसका अर्थ अधिकतम १ चाय-चम्मच नमक प्रतिदिन होता है. अतः भोजन पकाते समय नमक की अल्प मात्रा ही उपयोग में ली जानी चाहिए.


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